मुंबई के विक्रोली की एक अदालत ने आवासीय सोसायटी के एक सदस्य की शिकायत से जुड़े मामले में बार-बार पेश नहीं होने पर विक्रोली के पूर्व वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सूर्यकांत नाइकवाड़ी और तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (DCP) (जोन-7) विजयकांत सागर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पी.वी. हिंगणे ने 14 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत ये वारंट जारी किए। अदालत ने विक्रोली पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को निर्देश दिया कि दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाए। विक्रोली पूर्व के कन्नमवार नगर स्थित अनुसूयासूत को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड की प्रबंध समिति के सदस्यों के खिलाफ भी वारंट जारी किए गए हैं।
यह मामला सोसायटी के निवासी समीर वामन गावणकर की शिकायत से जुड़ा है। उनका आरोप है कि पुलिस ने सोसायटी की प्रबंध समिति के खिलाफ उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय उसे ‘दीवानी प्रकृति का मामला’ बताकर खारिज कर दिया था। समीर गावणकर की तरफ से वकील के.वी.जे. राव ने पैरवी की। पुलिस अधिकारी छह बार अदालत में पेश नहीं हुए। इसलिए अदालत ने विक्रोली पुलिस स्टेशन के तत्कालीन वरिष्ठ निरीक्षक सूर्यकांत नाइकवाड़ी और तत्कालीन DCP विजयकांत सागर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है।
यह विवाद 50 साल से अधिक पुरानी सोसायटी के प्रस्तावित पुनर्विकास को लेकर है। इस सोसायटी में भूतल और चार मंजिलों वाली दो इमारतों में कुल 80 फ्लैट हैं। पुनर्विकास का विरोध कर रहे कुछ सदस्यों ने प्रबंध समिति पर नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
समीर गावणकर ने कहा कि वह पुनर्विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन चाहते हैं कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कानून के मुताबिक हो। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में उन्होंने विक्रोली पुलिस स्टेशन के तत्कालीन वरिष्ठ निरीक्षक सूर्यकांत नाइकवाड़ी से संपर्क किया। वर्ष 2024 में कई बार पुलिस स्टेशन जाने के बावजूद उनकी प्रतिक्रिया ठंडी रही। इसके बाद उन्होंने DCP विजयकांत सागर से संपर्क किया, लेकिन उनका आवेदन वापस पुलिस स्टेशन भेज दिया गया। बाद में समीर गावणकर ने मुंबई पुलिस आयुक्त कार्यालय को ईमेल भेजा, जिसके बाद शिकायत की जांच के लिए एक अधिकारी नियुक्त किया गया।
समीर गावणकर का आरोप है कि उनकी शिकायत की जांच के लिए एक अधिकारी नियुक्त किया गया था, जिसने आश्वासन दिया कि वह जल्द से जल्द जांच पूरी कर लेगा, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।
10 नवंबर 2024 को विक्रोली पुलिस स्टेशन के कानून-व्यवस्था विभाग से जुड़े पुलिस निरीक्षक संदेश मोरे ने समीर गावणकर को पत्र लिखकर उनकी शिकायत को ‘दीवानी प्रकृति का मामला’ बताया और उन्हें सक्षम प्राधिकारी के पास जाने की सलाह दी।
इसके बाद समीर गावणकर ने विक्रोली कोर्ट में पिटीशन फाइल कर दी।
